एक ऑनलाइन स्टोर बनाएँ: ऑनलाइन बिक्री खासकर तब ज्यादा प्रभावी होता है जब वे उत्पाद भौतिक बाजारों में ज्यादा ध्यान आकर्षित नहीं कर पाते हैं, लेकिन हाँ रोजमर्रा की चीजें भी बहुत से लोग ऑनलाइन खरीदते हैं, यदि आप वेब तकनीक के बारे में ज्यादा नहीं जानते या वेवसाइट को सँभालने के मामलें में उलझना नही चाहते हैं, आप अपने स्टोर को इबे (eBay) या कैफेप्रेस (caffePress) पर भी बना सकते हैं जो मुफ्त हैं। अथवा यह काम आप किसी वेब डिज़ाइनर को किराये पर रख कर या स्वयं भी कर सकते हैं।

इन साइटों का उपयोग लिंक को Short करने के लिए किया जाता है उसके बाद आप उस Short link या URL को जादा से जादा शेयर करना होता हैं आप इन्हें Social Sites (जैसे Facebook और Twitter)  या आप इसे अपनी खुद की ब्लॉग या साइट पर भी Use कर सकते हैं। जब भी कोई Visitor आपके short URL या link पर क्लिक करता है तो कुछ पैसे आपके URL शॉर्टनर Site के Account में add कर दियेे जाते है।
इसलिए मेरा तर्क यह है कि रेलमंत्री प्रचार पर कम ध्यान दें और काम पर ज्यादा. रेल बोर्ड से पूछें कि गरीब और साधारण परिवार के छात्रों को 2,000 किलोमीटर भेजने का क्या तुक है. किस तरह से यह ऑनलाइन परीक्षा है, जिसके लिए किसी को 35 घंटे, तो किसी को 40 घंटे की यात्रा करनी पड़ रही है. बेपरवाही की भी हद होती है. अनगिनत महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर ट्वीट करने वाले रेलमंत्री को इन छात्रों की समस्या पर ट्वीट करना चाहिए और समाधान निकालना चाहिए.
पिछले साल रेलवे ने 64,317 पदों की वेकेंसी निकाली थी, जिसकी पहली परीक्षा अगस्त, 2018 में हुई. 31 मार्च तक फार्म भरे गए थे. 47 लाख से अधिक छात्रों ने फार्म भरे थे. इन सबका सेंटर अचानक 1,500-2,000 किलोमीटर दूर दे दिया गया. किसी को ट्रेन में रिज़र्वेशन नहीं मिला, तो किसी के पास टिकट के पैसे नहीं थे. किसी तरह इम्तिहान देने पहुंचे, तो रात प्लेटफार्म पर गुज़ारी. बहुत से छात्रों का इम्तिहान इसलिए छूट गया कि उनकी ट्रेन लेट हो गई. छात्र चिल्लाते रहे, रोते रहे, रेलमंत्री को ट्वीट करते रहे, मगर किसी को कुछ फर्क नहीं पड़ा.


ऑनलाइन बुक राइटिंग – पहले जहाँ बुक लिखकर पब्लिश करवाना किसी टेढ़ी खीर जैसा मुश्किल लगता था वहीँ आज इंटरनेट के इस दौर में अगर आप अपनी बुक लिखना चाहते हैं तो बिना किसी खर्च के किसी भी ई बुक पब्लिशिंग वेबसाइट पर फ्री में अपनी ई-बुक पब्लिश करके ऑनलाइन बेच सकते हैं। अमेज़न, फ्लिपकार्ट, ईबे जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ई -बुक्स को बड़ी आसानी से बेचा जा सकता है।
इंटरनेट मार्केटिंग – इंटरनेट के इस ज़माने में मार्केटिंग में भी इंटरनेट की मदद की ज़रूरत पड़ती है। ऐसे में डिजिटल मार्केटिंग या इंटरनेट मार्केटिंग एक बहुत बड़ा एरिया बन गया है क्योंकि इंटरनेट पर मौजूद हर एक कंपनी या वेबसाइट को इस इंटरनेट मार्केटिंग का सहारा लेना ही पड़ता है। प्रोडक्ट्स, सर्विसेज, वेबसाइट, एप्प की ऑनलाइन मार्केटिंग का तरीका है इंटरनेट मार्केटिंग, जिसे बहुत आसानी से और कम समय में सीखा जा सकता है।
डोमेन नाम बदलना: डोमेन नाम इंटरनेट जगत के मूल्यवान रियल एस्टेट हैं और कुछ लोग इन्हें बेच और खरीद के अच्छी कीमत कमा रहे हैं। रणनीति के लिए आप गूगल एडवर्ड का इस्तेमाल कर ज्यादा चलन में आ रहे संकेत शब्दों (Keywords) को खोज सकते हैं और अनुमान लगा सकते है कि कौनसे डोमेन नाम की भविष्य में मांग हो सकती हैं। हालाँकि छोटे, रोचक, या सीधे अच्छे डोमेन नाम पहले ही लिए जा चुके हैं, लेकिन फिर भी आप कोई भी आधिवर्णिक (Random acronyms) डोमेन भी ले सकते हैं, जैसे कि कोई नही जानते कि कब किसी व्यक्ति या कंपनी को अपनी वेबसाइट बनाने के लिए उसी नाम की जरूरत हो जाये। (उदहारण के लिए, CPC.com, जो ₹1,20,00000 में बिका था जब कॉन्ट्रैक्ट फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन ने ऑनलाइन आने का निर्णय लिया।[१] तीन अक्षरो के लिए यह कीमत बुरी नहीं हैं।)
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