अगस्त, 2018 में खुद रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ही ट्वीट किया था कि 74 फीसदी छात्र परीक्षा में शामिल हुए. यानी 47.56 लाख छात्रों में से 26 प्रतिशत परीक्षा देने से वंचित रह गए. इस तरह बिना इम्तिहान दिए ही 12 लाख से अधिक छात्र बाहर हो गए. जब पहले चरण की परीक्षा का रिज़ल्ट आया, तो 12 लाख छात्र ही दूसरे चरण के लिए चुने गए. अब जब संख्या छोटी हो गई, तो इनके सेंटर तो राज्य के भीतर दिए जा सकते थे. अगर नकल गिरोह से बचाने का तर्क है, तो यह बेतुका है, क्योंकि आजकल ऐसे गिरोह अखिल भारतीय स्तर पर चल रहे हैं, इसलिए सरकार को अपने सेंटर की निगरानी बेहतर करनी चाहिए, न कि छात्रों को 2,000 किलोमीटर दूर भेजकर परेशान करना चाहिए.

शिक्षा माफियों की पैठ और फर्जी कक्ष निरीक्षकों की तैनाती पर लगाम लगाने के लिए माध्यमिक शिक्षा की ओर से इस साल ऑनलाइन केंद्र बनाने का नया प्रयोग किया गया। वहीं सीबीएसई बोर्ड ने भी पारदर्शिता लाने के लिए हाई स्कूल के होम एग्जाम इसी साल से समाप्त कर दिए। अब हाईस्कूल में भी बोर्ड एग्जाम ही होंगे। इससे स्कूलों की ओर से किए जा रहे फर्जीवाड़े पर लगाम लगी। इसके अलावा सीआईएससीई बोर्ड ने इस बार मार्किंग का पैटर्न बदल दिया। ऐसे में 33 की जगह पासिंग मार्क्स अब 35 कर दिए हैं। सारी प्रतियोगी परीक्षाओं में आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया।
प्रतियोगिताओं में भाग लें: हालाँकि इसमें आपको जीते बिना पैसे नही मिलंगे। आपके कार्यक्षेत्र जैसे फोटोग्राफी, लोगो बनाना, बैकग्राउंड निर्माण में मौजूद "मुफ्त" प्रतिगिताओं की खोज करें और आपकी प्रतियों को ज्यादा से ज्यादा जगहों पर सबमिट करें। यह सब करने में एक पूरा दिन भी लग सकता हैं, लेकिन उनमें से कुछ सफल भी हो सकते है (या, शायद, बहुत सारे भी)। इससे मिलने वाला अनुभव आपको अन्य नए रचनात्मक रास्तो की खोज भी करा सकता है।
×