इन साइटों का उपयोग लिंक को Short करने के लिए किया जाता है उसके बाद आप उस Short link या URL को जादा से जादा शेयर करना होता हैं आप इन्हें Social Sites (जैसे Facebook और Twitter)  या आप इसे अपनी खुद की ब्लॉग या साइट पर भी Use कर सकते हैं। जब भी कोई Visitor आपके short URL या link पर क्लिक करता है तो कुछ पैसे आपके URL शॉर्टनर Site के Account में add कर दियेे जाते है।
एलयू में इंजिनियरिंग फैकल्टी की शुरुआतलखनऊ विश्वविद्यालय (एलयू) ने छात्रों को विभागों के चक्कर न लगाने पड़े, इसके लिए यूनीक आईडी पोर्टल योजना की शुरुआत की। अब छात्रों को इस पोर्टल की सहायता से एक लॉग इन से सारी जानकारी मिलेगी। इसके अलावा शिकायत के लिए भी पोर्टल लॉन्च किया गया। एलयू में इंजिनियरिंग फैकल्टी की भी शुरुआत की गई, जिसकी पहली ही काउंसलिंग में सीटें भी फुल हो गईं। छात्रों को दीक्षांत में सिक्यॉरिटी फीचर वाली डिग्री और मार्कशीट दी गई। वहीं बीएलईडी का नया कोर्स भी सम्बद्ध कॉलेजों में शुरू किया गया।

शिक्षा माफियों की पैठ और फर्जी कक्ष निरीक्षकों की तैनाती पर लगाम लगाने के लिए माध्यमिक शिक्षा की ओर से इस साल ऑनलाइन केंद्र बनाने का नया प्रयोग किया गया। वहीं सीबीएसई बोर्ड ने भी पारदर्शिता लाने के लिए हाई स्कूल के होम एग्जाम इसी साल से समाप्त कर दिए। अब हाईस्कूल में भी बोर्ड एग्जाम ही होंगे। इससे स्कूलों की ओर से किए जा रहे फर्जीवाड़े पर लगाम लगी। इसके अलावा सीआईएससीई बोर्ड ने इस बार मार्किंग का पैटर्न बदल दिया। ऐसे में 33 की जगह पासिंग मार्क्स अब 35 कर दिए हैं। सारी प्रतियोगी परीक्षाओं में आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया।
एजुकेशन के लिए साल 2017 खास बदलावों के नाम रहा। शिक्षा विभाग से लेकर शहर के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए काफी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। माध्यमिक शिक्षा विभाग में ऑनलाइन केंद्र बनाने का निर्णय लिया गया तो सारी प्रतियोगी परीक्षाओं में आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया। वहीं छात्रों की शिकायत के निस्तारण के लिए विशेष कॉल सेंटर खोलने पर भी मुहर लगाई गई। इस साल 2017 में शिक्षा में बदलाव के लिए हुए प्रयासों पर विशेष रिपोर्ट:
काम के लिए दूसरे पेशेवरों को जोड़ें: यदि आप किसी को जानते हैं जिनकी योग्यता, कौशल और नीति बेहतर हैं, उनके बारे में प्रत्याशित काम देने वाले को बताएँ। यदि उस व्यक्ति को काम के लिए चुन लिया जाता हैं, तो आपको भी उनके कार्य के दर्जे के अनुसार 3000 से कईं हजारो रूपये आपको मिल सकते है। ज्यादा जानकारी के लिए इन वेबसाइट को देखें जैसे ReferEarns या WhoDoYouKnowForDough इत्यादि।
इसलिए मेरा तर्क यह है कि रेलमंत्री प्रचार पर कम ध्यान दें और काम पर ज्यादा. रेल बोर्ड से पूछें कि गरीब और साधारण परिवार के छात्रों को 2,000 किलोमीटर भेजने का क्या तुक है. किस तरह से यह ऑनलाइन परीक्षा है, जिसके लिए किसी को 35 घंटे, तो किसी को 40 घंटे की यात्रा करनी पड़ रही है. बेपरवाही की भी हद होती है. अनगिनत महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर ट्वीट करने वाले रेलमंत्री को इन छात्रों की समस्या पर ट्वीट करना चाहिए और समाधान निकालना चाहिए.

प्रतियोगिताओं में भाग लें: हालाँकि इसमें आपको जीते बिना पैसे नही मिलंगे। आपके कार्यक्षेत्र जैसे फोटोग्राफी, लोगो बनाना, बैकग्राउंड निर्माण में मौजूद "मुफ्त" प्रतिगिताओं की खोज करें और आपकी प्रतियों को ज्यादा से ज्यादा जगहों पर सबमिट करें। यह सब करने में एक पूरा दिन भी लग सकता हैं, लेकिन उनमें से कुछ सफल भी हो सकते है (या, शायद, बहुत सारे भी)। इससे मिलने वाला अनुभव आपको अन्य नए रचनात्मक रास्तो की खोज भी करा सकता है।
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